Rs Industries India Real Story
नमस्कार दोस्तों
जैसा कि मुझे उम्मीद है आपसे की आप सभी को सच्चाई की राह पर चलते हुए अच्छा लगता है तो मैं आपको अपने बीते हुए कुछ पल का एहसास जो कि मुझे अपनी नौकरी के दौरान मुझे ज्ञात हुआ कि मैं जितना गलत हूं आज मुझे पता चला किसी ने मुझे बताया तो मैं आज आपको बताना चाहता हूं कि मैं आज कितना गलत साबित हुआ और कैसे हुआ आप अगर मेरी कहानी का हर एक पहलू झूठ मानते हो तो मेरे इस कहानी में जितने भी आपको मिलेंगे शख्स उन सब की डिटेल मैं आपको दे दुंगा
कहानी मेरी शुरू होती है
उस पल से जिस पल मैं कृष्णा पॉलीमर से जॉब छोड़ने के 2 महीने तक घर पर बैठा हुआ था मैं आपको सारी वजह भी बता दूंगा की कृष्णा पॉलीमर से मैंने नौकरी क्यों छोड़ी या कौन सी वजह से मेरी नौकरी छूट गई मैं आपको उसके बारे में सभी कुछ विस्तार से जहां तक मुझे ज्ञात होगा मैं आपको सब कुछ बताऊंगा तो मैं आपको फिलहाल इस पेज पर
*आर एस इंडस्ट्रीज इंडिया*
के बारे में ही बताना चाहता हूं
सबसे पहले मैं आपको मैं उस शख्स से परिचय करा दो जिस शख्स का मैं हमेशा ही शुक्र गुजार रहा हूं
दीपक सैनी जो कि मीमारपुर गांव से संबंध रखते हैं उनका पूरा परिवार मीमार पुर गांव से संबंध रखता है फिलहाल वह सेक्टर 14 सोनीपत में रहते हैं।
यह शख्स जिंदगी में मैं अपनी लाइफ में सबसे बेस्ट मानता हूं जिन्होंने मेरी हर एक प्रस्थितियों में मेरी हमेशा मदद करी है।
इस कलयुग के जमाने में कोई किसी की मदद तो नहीं करता लेकिन कुछ लोग होते हैं जो आपकी दिल से मदद करते हैं जिनको किसी भी प्रकार के लोक लुभावने दूर दूर तक नहीं लेना होता
इन्होंने मेरी नौकरी हसनगढ़ गांव में लगवाई
इन के सहयोग से अमन एंटरप्राइजेज में 44 दिन की नौकरी मैंने करी जहां मुझे शुरुआत में ₹15000 महीने की मासिक सैलरी पर रखा गया था और जब मेरे भाई की शादी थी जून के महीने में तो मुझे घर जाना था मुझे ₹12000 के हिसाब से 44 दिन के पैसे दिए गए।
aman enterprise एक ऐसी कंपनी थी जिसमें कुछ ऐसी घटनाएं हुई थी जिसका मैंने उसी कंपनी के नाम से एक पेज बनाया था और उस पर मैंने सारी डिटेल मेंशन की हुई है कि किस प्रकार मैंने वहां जॉइन किया वहां पर क्या-क्या हुआ आप पढ़ सकते हैं हर एक कहानी को जो मेरी वास्तविक घटना से 100% सच्चाई की कहानी है।
भाई की शादी होने के बाद जब मैं मैक्सिमम एक हफ्ते घर पर बैठा हुआ था तो इनका फोन आया की जॉब कर रहे हो या घर बैठे हो तो मैंने उनको बोला कि मैं आपका इंतजार कर रहा था कि आप मुझे संपर्क करेंगे उसके बाद हम दोनों कृष्णा पॉलीमर्स गए जहां उन्होंने मेरी दूसरी बार कृष्णा पॉलीमर्स में नौकरी लगवाई मेरी पिछली कंपनी से यह कंपनी अच्छी थी जहां मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला कृष्णा पॉलीमर्स की कहानी आप कृष्णा पॉलीमर्स के पेज पर पढ़ सकते हैं
अब मैं आता हूं दीपक जी के सैनी की लाइफ पर
जिस समय में कृष्णा पॉलीमर्स में लगा हुआ था उस समय एक घटना घटी थी बहुत असहनीय
बेझिझक मैं उनके साथ कुछ भी शेयर कर सकता था लेकिन हम दोनों के बीच में कुछ लिमिटेशन सी थी ।
वह मेरे गुरु के समान थे जिन्होंने मुझे अकाउंट्स के बारे में बहुत कुछ सिखाया बिना कुछ लेनदेन के नहीं तो यहां मैंने बहुत सारे लोग देखे होंगे जिन्होंने अपनी जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव देखे
उनकी जिंदगी में मैं एक पल ऐसा भी आया जिस पल मैंने महसूस किया।
इंसान की सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि वह अपने मां बाप को एक खुशी खुशी जिंदगी के साथ कनेक्ट रहे उस समय तक जिस समय उनको जरूरत हो।
उनके पिताजी स्वर्गीय कृष्ण सैनी ने बहुत मेहनत करी अपने बच्चों को पाला और उम्र के उस पड़ाव में रहते हुए भी अपने बच्चों को कभी अपने उस उम्र का एहसास नहीं होने दिया जिस उम्र में आकर लोग अपने आप को थका हुआ महसूस करते हैं उनकी जिंदगी एक ऐसी थी कि वह अपनी पूरी जिंदगी में किसान भी दिखे और उस जिंदगी में उन्होंने नौकरी भी करी बहुत करीब से तो नहीं जानता मैं लेकिन इतना जानता हूं कि जो पिता अपने बच्चों के लिए अपने परिवार के लिए मेहनत की रोटी के लिए घर से 18 किलोमीटर या 20 किलोमीटर की दूरी पर एटलस साइकिल कंपनी में मेहनत का पैसा कमाने के लिए रेगुलर ड्यूटी आ सकते हैं वह भी साइकिल पर तो उनको एक सैल्यूट तो बनता है
बड़े ही दुख की घटना थी उस वक्त जिस वक्त में एक दोस्त की शादी में गया हुआ था और अचानक दीपक जी का मैसेज आया कि मेरे पिताजी का स्वर्गवास हो गया वह पल मेरे लिए बहुत ही निंदनीय था मैं कुछ भी समझ नहीं पा रहा था अचानक एक पल ऐसा आता है जिस पल आप खुशी-खुशी रहते हैं और एक दुखद घटना आपको उस पल में ले जाती है जिस पर सोच में डूबा हुआ महसूस करते हैं
आदमी की अहमियत जब ही पता चलती है जब उसकी दो शादी होती है और दोनों शादियों में लोगों का आगमन यह बताता है कि वह शख्स कितना महान था जब दीपक जी के पिता जी का स्वर्गवास हुआ और उस दिन में उनके घर पर पहुंचा जय प्रकाश शर्मा के साथ गया हुआ था तो वहां पर लोगों की भीड़ ने मुझे एहसास करा दिया कि वह शख्स कितना महान था भगवान उनको स्वर्ग की प्राप्ति दे यही दुआ थी मेरी उस समय में क्योंकि कलयुग के समय में लोगों के पास समय नहीं होता लेकिन जो कुछ अच्छा करके जाता है तभी लोगों के दिल में उनके प्रति प्यार दिखाई देता है जिंदगी में कुछ रह तो नहीं जाता लेकिन आपका व्यवहार ही बताता है कि आप उस पल में सराहनीय होते हैं उनके पिता जी के आकस्मिक मृत्यु हुई थी जिस पल परिवार के साथ वह खेत में काम करने गए हुए थे और जब घर वापस आए तो उनके दिल में दौरा पड़ा और अचानक ही वह बेहोश हो गए परिवार के लोग उनको लेकर अस्पताल में पहुंचे हैं लेकिन उससे पहले ही वह भगवान को प्यारे हो गए थे
उस पल मैंने एक बात महसूस करी
वैसे मैं किसी को जज तो नहीं करता लेकिन मैंने एक बात सच्ची में महसूस करी थी उस शख्स के लिए जिसके यहां मैं नौकरी करता था कृष्णा पॉलीमर्स का मालिक पंकज गोयल और कोरोनेशन पेंट का मालिक संजय बंसल यह दोनों शख्स काम के प्रति बहुत ही अच्छे थे लेकिन कुछ पल में आप महसूस करते हैं कि उन लोगों का साथ मिले जो आपको एहसास दिला सके उस पल में आप के साथ खड़े रह सके क्योंकि जिंदगी भर आप काम तो आपको करना ही है लेकिन अगर आपकी जिंदगी के लिए दूसरों के पास समय नहीं है तो आप उनको क्यों समय दोगे छोटी छोटी बातें ही लोगों की बीच दूरियां पैदा कर देती है।
मेरे दिल में उस समय की यह घटना भूले नहीं भूले जा रहे थे कि जिसके यहां नौकरी करते हैं वह बंदा आखिर मेरे दुखद समय में क्यों नहीं साथ था।
कृष्णा पॉलीमर छोड़े जाने के बाद छोड़ने की वजह मैं कृष्णा पॉलीमर्स की पेज पर लिख चुका हूं आप बाकायदा पढ़ सकते हैं
आर एस इंडस्ट्रीज में जब इन्होंने मेरी नौकरी लगवाई तो मैं वहां एक जुबान दे चुका था मैंने वहां पर सिक्योरिटी गार्ड से बात करी।
कि यहां पर ड्यूटी टाइमिंग क्या है तो उसने मुझे 8 घंटे की जॉब बताई घर से 9 किलोमीटर की दूरी पर यह कंपनी मुझ को सबसे बढ़िया लगा लेकिन कहते हैं ना कि वक़्त आपको मजबूर कर देता है कि आपकी पसंदीदा चीज एक समय उस पहलू में आकर गिर जाती है जिस पल आप उसको ना पसंद करने लगते हैं तो हुआ भी कुछ ऐसा ही मेरे साथ मैंने जब आर एस इंडस्ट्रीज ज्वॉइन करीं तो शुरुआत में ही मुझे एहसास हो गया कि यह कंपनी पिछली कंपनी से 50 गुना नियम और कानून के दायरे में नहीं आती क्योंकि आपको एहसास नहीं होता आपको शुरुआत में ही वहां का शख्स ही आपको बयान कर देता है कि किस प्रकार की कंपनी है
मैंने जब कंपनी ज्वाइन करें तो मुझे 3 अक्टूबर से बुलाया गया मैं भी क्या कर सकता था 1 अक्टूबर की गांधी जयंती थी 2 अक्टूबर को संडे था शायद 2 दिन के पैसे कंपनी मुझे नहीं देना चाहती थी तो यह एहसास ही मुझे ज्ञात हो गया कि कंपनी कितना नियम और कानून को अच्छी तरीके से समझती है सरकार को नहीं समझती है
जब मैं 3 तारीख को सोमवार के दिन सुबह 9:00 बजे ऑफिस पहुंच गया तब वहां का माहौल देख कर मैं दंग रह गया क्योंकि माहौल कंपनी का कुछ अलग ही था कंपनी के मजदूर को जिस गाड़ी में हम कंपनी का माल लोड करवाते थे उसमें उनको बैठा कर लाया जाता था कुछ बंदे बस में आते थे कुछ लोगों को Eicher motors Tata 407 में लाया जाता था । इतनी निंदनीय स्थिति मैंने नहीं देखी थी जहां पर मजदूर आपको मजदूरी करके देते हैं मजदूर की मजदूरी के बल पर आप अपनी कंपनी को चलाते हैं और कंपनी के मजदूर के लिए कोई भी नियम नहीं
फिर भी मैं चुप रहा क्योंकि नौकरी तो ऐसे ही करनी पड़ती है जहां पर आपको दूसरों से कोई मतलब नहीं होता आपको अपने काम से लेना देना होता है। डेढ़ दो घंटे की इंतजार करने के बाद जिन्होंने मेरा इंटरव्यू लिया था अजय तिवारी जी उनका आगमन हुआ बहुत ही अच्छे तरीके से सफेद रंग की बाइक मैनेजर और लेबर कोई समानता तो नहीं होती लेकिन फिर भी दोनों मालिक के लिए ही नौकरी करते हैं बहुत ज्यादा डिफरेंस का 10 गुना
उनके आने से पहले हमारे वहां के ललन कुमार झा जी जो कि अकाउंट्स देखते थे उनका आगमन हो चुका था उनकी बाइक देख कर पता चला कि वह कितने मजबूर हैं इस नौकरी को करने के लिए घर से 22 किलोमीटर दूर बहादुरगढ़ से आना और वापिस जाना बाइक पर आपको आपकी स्थिति का एहसास करा सकता है बहुत अच्छे तरीके से।
लेकिन क्या करें करना पड़ता है नौकरी नहीं करोगे तो परिवार का खर्च कहां से निकलेगा।
अजय तिवारी से मिलने के बाद उन्होंने मुझे बताया कि आप जाकर ललन कुमार झा जी से मिलीए वह आपको आपका काम बता देंगे आपको क्या करना है
मुझे एहसास नहीं था कि कंपनी का ऑफिस कहां पर है जहां पर मेरे को बैठना है क्योंकि आप नई जगह जाते हैं तो आप अपनी कुर्सी को तलाशते हैं कि आपकी कुर्सी कहां है गेट पर दो ढाई घंटे बैठने के बाद मैंने चौकीदार से पूछा कि मुझे कहां पर बैठना है तो मुझे उसने इशारों इशारों में बता दिया क्या आपको सीढ़ीयों की मदद से पहले फ्लोर पर जाना है
वहां पर जाने के बाद लल्लन जी अकाउंटेंट की कुर्सी पर विराजमान थे मैंने उनको नमस्ते किया लेकिन वह परेशान रहते थे काम को लेकर क्योंकि काम बहुत ज्यादा था वह एकाउंट्स भी देखते थे एचआर का भी काम करते थे तो आप समझ सकते हैं किस शख्स कितना दुखी रहेगा उन्होंने मेरा सलाम हवा में ही रखा और मुझे हवा में सलाम दिया
नए बंधुओं को देखकर पूछना है हर किसी की आदत होती है कि आपका यहां पर आगमन कैसे हुआ किस लिए आए हो
जब मैंने उनको बताया कि मैं यहां अकाउंट्स की जॉब के लिए आया हूं तो उनके चेहरे का भाव देखने लायक था उनके चेहरे से वह रौनक जो कुछ घंटे पहले थी वह उड़ चुकी थी उन्होंने एक ही दम बोला कि मैं यहां अकाउंटस देखता हूं
ललन कुमार झा जी को एहसास हो गया था कि उनकी नौकरी खतरे में है उन्होंने 3 दिन बाद ही अपना मन बना लिया कि मुझे आर एस इंडस्ट्रीज इंडिया में जॉब नहीं करनी है
मैं उनके साथ 3 साल तक अभी भी करंट में भी उन्होंने मेरे सामने है किसी इंटरव्यू और से बात करें उसको रिज्यूम भेजा और शाम को जाने से पहले बोला कि मुझे कि कल मैं नहीं आ पाऊंगा
अजय तिवारी को बता देना कि मुझे जरूरी काम है मुझे एहसास हो गया था कि लल्लन कुमार झा जी यहां से जाने वाले हैं क्योंकि जब मैंने उनसे कहा कि कोई बात नहीं जी मिल बांट कर काम कर लेंगे तो उनका एक ही शब्द था अचानक वह बोल पड़े कि साला कल का लौंडा आया हुआ कुर्सी पर बैठेगा अकाउंट्स देखेगा और मैं इतने दिन से एचआर का काम करूंगा लेबर के पीछे भागूंगा उनकी बातें मेरे दिल को लग गई थी मैंने भी मन में ठान लिया था की प्राइवेट नौकरी किसी की नहीं होती यहां आपको अपनी पहचान उतनी बनानी पड़ती है जितने कंपनी को आवश्यकता होती है अगर आप कुछ पहचान से कम होते हैं तो आपकी वैल्यू कम होती है झां जी दिल्ली में थोड़ा उनका हाथ काम चलता था और कंप्यूटर पर स्पीड भी कम थी उनके इस वजह से जब बिल बनाते थे तो उनको थोड़ा समय देना पड़ता था लेकिन आर एस इंडस्ट्रीज इंडिया में जब दिल बनता है तो आपको स्पीडअली बिल बनाना पड़ता मेरी स्पीड अच्छी थी कंप्यूटर कीबोर्ड पर इस वजह से मैं चुना गया था और एक और बात थी कि मैंने कंपनी को टाइम दिया था कि कंपनी कितना टाइम मुझसे लेगी मैं उतना दे दूंगा लेकिन जॉइनिंग के कुछ दिनों बाद पता चला कि मैं कंपनी को जितना समय दूंगा उतना ही कम है ऐसा मुझे समय के हिसाब से नहीं मिलेगा बल्कि कंपनी के रूल एंड रेगुलेशन से मिलेगा आप कितना भी समय दे कर जाओ कंपनी आपको 1 महीने का ही पैसा ₹20000 देगी इस बात से मेरी उम्मीदें और कम हो गई थी इस कंपनी को लेकर कुछ लोगों का यह मानना था कि मजबूरी है तो यह नौकरी है तो शायद मैं भी मजबूर हो गया था क्योंकि आर एस इंडस्ट्रीज इंडिया में नियम और कानून कागजों में चलते थे जमीन स्तर पर दूर-दूर तक नहीं कुछ लेना देना रहता था।
ललन कुमार झा जी की बात बहादुरगढ़ हो गई तो उन्होंने मुझे एक बात कही एकाउंट्स का काम फंसा कर रखो जितना बचा कर रखोगे इतना आपके लिए अच्छा है क्योंकि जिस दिन आपने अपना काम कंप्लीट करके दे दिया उस दिन आपका कंपनी से रेजिग्नेशन लेटर पक्का
जाते जाते उन्होंने कंपनी से एक और झूठ बोला कि मुझे गांव जाना है और मुझे रिजाइन देना है कंपनी ने उनके सारी शर्तों को स्वीकार करते हुए उनको उनके बिताए हुए दिन के पैसे बकायदा समय से उनके अकाउंट में ट्रांसफर कर दिए उनसे कोई सवाल जवाब नहीं हुआ उनको नौकरी पर रखने ना रखने का कोई बात विचार नहीं हुआ
उनके जाने के बाद काम का प्रेशर सीधा मेरे ऊपर आ गया तो मैंने सीधा सीधा कह दिया कि मुझे एक बंदा चाहिए जो एचआर का काम दिखेगा कुछ दिनों बाद राहुल कुमार जो कि HR का काम देखता है फिलहाल उसकी एंट्री हुई जब उसका इंटरव्यू लिया जा रहा था तो मैं उसके पास में था अजीब सी कशिश थी के अजय तिवारी उसका इंटरव्यू लेने के बाद उससे rahul HR पूछा कि आप कितना सैलरी लेंगे तो राहुल एचआर ने अपना 6 साल का एक्सपीरियंस में सैलेरी यह बताएं कि मैं पिछली जगह ₹10000 लेता हूं और इतनी दूर आऊंगा तो तेरा हजार मैं यह सुनकर स्तब्ध हो गया था कि जो बंदा 6 साल का एक्सपीरियंस एचआर में रखता है वह ₹13000 में कैसे मांगे क्योंकि उसकी मजबूरी थी
मजबूरी भी अजीब पहेली होती है ना कुछ भी करने पर मजबूर करवा देती है मालिक लोग मजबूर लोग को देखते हैं जो उनके यहां मजदूरी कर सकें कम पैसे में।
ललन कुमार शाह जी जब काम पर थे तो वह इतने घमंडी हुआ करते कि जब मैंने उनसे पूछा श्रीमान जी मुझे जानकारी दे दीजिए कि यहां पर काम हैंडल कैसे करना है तो उन्होंने सीधा बोला कि मैंने यहां पर कोई कोचिंग क्लास थोड़ी ना खोल रखी है मैं भी
Comments
Post a Comment