08/01/2019 rs industries india akbarpur barota radhana road sonipat haryana

8 जनवरी 2019
दिन इसलिए यादगार नहीं है कि इस दिन मेरे साथ कुछ हुआ था

यह दिन इसलिए यादगार है आरएस इंडस्ट्रीज इंडिया में काम करने वाला एक बंदा जिसका नाम रामनरेश था उसकी मृत्यु कुछ लोगों की गलतियों की वजह से उस विचारे को इस दुनिया से छोड़कर जाना पड़ा और उसके बाद भी उसकी मौत से लोगों को कुछ समझ नहीं आया यानी मुझे यह देखने को मिला कि एक मौत की कीमत आज के दौर में कुछ भी नहीं है

वास्तव में उस दिन क्या हुआ था मैं आपको सच्चाई बताता हूं

योगेंद्र की उंगलियों का कटने के बाद कुछ महीनों बाद लीलाराम की उंगलियां भी उस से अलग हो गए
लीलाराम का ईएसआई में नाम होने की वजह से राहुल कुमार ने सारा काम उसका ईएसआई पैनल पर करवा दिया लेकिन जब बात आई ईएसआई इंस्पेक्टर को कंपनी में आने की
तब ईएसआई इंस्पेक्टर के द्वारा यह कहे जाने की आपके द्वारा जो भी दस्तावेज कंपनी में मौजूद हैं वह वैलिड नहीं है ना तो आपकी अटेंडेंस रजिस्टर कंप्लीट है ना ही कंपनी के लोगों का नाम ईएसआईसी पैनल में अपडेट
इंस्पेक्टर का मुंह बंद करने के लिए
उसको 8 जनवरी 2019 को
एक गैसचूल्हा गिफ्ट में दीया जाना था
दोपहर भर हमने ऊपर ऑफिस में लंच के समय सारा स्टाफ बैठा हुआ था जिसमें लतीफ इलेक्ट्रीशियन दर्शन कुमार कंप्यूटर डिज़ाइनर राहुल कुमार एचआर हेड कुलदीप कुमार मार्केटिंग और मोहित क्वालिटी इंस्पेक्टर लंच के समय यह सब लोग आराम से लंच किया और उसके बाद हम सब अपने कामों में लग गए शाम को जब मैं अपना काम में लगा हुआ था अचानक मुझे सूचना प्राप्त हुई की कुलदीप जो की मार्केटिंग का काम करता था उसका एक्सीडेंट हो गया मुझे यह सुनकर बहुत ही दुःख हुआ के दोपहर के समय हम लोग सब इकट्ठे होकर खुशी खुशी लंच किया और शाम को ऐसा क्या हो गया
तुम मुझे पता चला कि कंपनी का एक बंदा बुरी तरह ज़ख्मी है उसका नाम रामनरेश मुझे यह समझ में नहीं आ रही थी कि अब दोनों बंदे शाम के समय करने क्या गए थे
suresh singh सुपरवाइजरrahul kumarएच आर ajay tiwari मैनेजर और अकाउंट साइड darshan computer designer mohit quality inspector
इन सभी के द्वारा पता चला की इंस्पेक्टर जो नीचे ऑफिस में आया हुआ था उसके लिए 1838 राई सनब्लेज कंपनी से गैस चूल्हा उसको गिफ्ट में देने के लिए कुलदीप कुमार और राम नरेश को भेजा गया है ताकि कंपनी का पुराना जो दस्तावेज है उसको ठीक करवाया जा सके और यह सब इंस्पेक्टर के साइन लिए जा सकें लेकिन होने जो होती है ना वह होकर रहती है गलत काम का एक दिन भांडा फूट जाता है और सच्चाई सबके सामने आकर रहती है कब तक आप झूठ का सहारा लेकर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करते रहेंगे मौत की कीमत आपको तब तक नहीं पता चलेगी जब तक आपका अपना आपके सामने दम ना तोड़ा हो
जब कुलदीप कुमार और रामनरेश 1838 से चूल्हा लेकर आ रहे थे तो अचानक बरोटा चौकी पर जोकि ब्रेकर था शाम का समय घर जाने की जल्दी स्कूटी की स्पीड तेज होने की वजह से
ब्रेकर पर जब स्कूटी गुजरी तो स्कूटी का बैलेंस बिगड़ गया और राम नरेश जो कि सर के बल पीछे की और गिर पड़ा गिरते हैं उसके सिर पर जोरदार चोट लगी और वह उसी समय मर गया
kuldeep singh को हल्की-हल्की हाथ पैरों में चोटे आई थी
सरकार के द्वारा जहां तक अपील किया गया है की चोट लगने या एक्सीडेंट होने पर फटाफट एंबुलेंस को बुला कर किसी भी नजदीकी हॉस्पिटल में फर्स्ट एड दिया जा सके लेकिन
अजय तिवारी का फटाफट फोन आया कि फटाफट इनके दस्तावेजों को तैयार करो
उनका ईएसआई कार्ड जल्दी से निकालो
जबरदस्ती तिवारी ने यह कहा कि यह ESIC पैनल पर ही इन दोनों को एडमिट करवाना है तो मैंने उसको बताया कि किसी दूसरे हॉस्पिटल प्राइवेट में जल्दी से जल्दी ले जाओ  तो उन्होंने रेफर किया कि सिगनस जेके हिंदू हॉस्पिटल मे ले जाओ
मुझे मालूम था कि  सिग्नस जेके हिंदू हॉस्पिटल
सोनीपत का सबसे घटिया हॉस्पिटल है जहां लोगों का इलाज बहुत कम गारंटी पर किया जाता है लेकिन आपसे पैसे सही वसूले जाते हैं जहां आप 2 दिन में ठीक होने वाले हो वहां आपको बेड पर एक हफ्ते तक लेटाया जाता है

सीनियर ना होने की वजह से हमारा तो कुछ कहना बनता ही नहीं था लेकिन हमारी जो सलाह थी वह किसी को पसंद नहीं आई और लोगों ने अपने मन की मर्जी है करी
दोनों को लेकर सिग्नस जेके हिंदू हॉस्पिटल पहुंचे जहां उन्हें फर्स्ट एड तो मिला लेकिन उन्होंने तुरंत ही बता दिया कि रामनरेश को हम एडमिट नहीं कर सकते क्योंकि इसके हेड इंजरी हुई है और इस को दूसरे हॉस्पिटल में ले जाएं

उस समय अजय तिवारी जी ने ईस आई कंसलटेंट को फोन किया और उससे जानकारी लेनी चाहिए कि हमें इस मौके पर क्या करना चाहिए उन्होंने सारी घटना phone par consultant ko bata diya कंसलटेंट में ज्यादा दस्तावेजों के लगने के चक्कर में यह बोला कि आप हॉस्पिटल में यह बताना कि रामनरेश और कुलदीप का एक्सीडेंट कंपनी में हुआ है
अब यही बात फोन पर राहुल को बताया गया और सिग्नस जेके हिंदू हॉस्पिटल में जब दोनों को ले गया तो डॉक्टर ने पूछा एक्सीडेंट कैसे हुआ तो कुलदीप ने जो जानकारी थी सही वाली डॉक्टर को वह जानकारी बताएं और राहुल एचआर ने जो उसको निर्देश दिया गया था उसने वह जानकारी बताएं जब डॉक्टर को पता चला कि केश लफड़े वाला है तो उसने दोनों को रिपोर्ट पर लिख कर दोनों के स्टेटमेंट लिखवा कर और साइन करवा लिए
शाम होती जा रही थी रात धीरे धीरे हो रही थी और सब को अपने घर जाने की पड़ी थी
जहां दूसरी तरफ दो लोगों की जिंदगी मौत से लड़ रहे थे राहुल और दर्शन को इन दोनों के साथ ईस आई हॉस्पिटल नरेला और बसई धारा लेकर जाना था
मैंने सभी के दस्तावेज निकाल कर जो देना मेरा फर्ज बनता था मैंने अपना फर्ज निभाया और मैं घर को चला आया रात को मैंने दर्शन को फोन किया तो दर्शन ने फोन पर कहा कि बाद में बात करता हूं मुझे सही जानकारी नहीं मिली मुझे लगा दोनों ठीक हैं और दोनों का इलाज हो रहा होगा
और सुबह जब मैं ऑफिस के लिए तैयार होकर निकल रहा था  हमारे supervisor सुरेश सिंह जी का फोन आया और उन्होंने बोला कि कंपनी बंद है और राम नरेश की मृत्यु हो गई है
यह सुनकर मैं शॉक स्तब्ध रह गया मैं समझ नहीं पा रहा था कि
वक्त ने कैसा खिलवाड़ किया किसकी गलती किसकी गलती छुपाने की कोशिश में किसको अपनी जिंदगी से हाथ धोना पड़ा यह आज भी मेरे जदो जहान में वहीं घटना बार-बार मन में घूमती रहती है
और जब तक उस इंसान को इंसाफ नहीं मिलेगा तब तक  मेरी कोशिश रहेगी कि सच्चाई लोगों के सामने ला सकूं

मैं

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